तीन वर्ष पहले वायरल हुआ आपत्तिजनक वीडियो एक बार फिर वायरल हो गया। खानपुर विधानसभा से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार के निजी सहायक कुशाग्र जोशी की ओर से दुर्भावना के तहत सुनियोजित तरीके से निर्वाचित जनप्रतिनिधि की सामाजिक और सार्वजनिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने और महिला की गरिमा, सम्मान और निजता पर गंभीर आघात पहुंचाने का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी गई। उन्होंने तीन सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी पुलिस को तहरीर में दी, जिन पर वीडियो को वायरल किया गया है। पुलिस ने आईटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है।कुशाग्र जोशी निवासी नेहरु कालोनी, देहरादून की ओर से पुलिस को दी गई तहरीर में बताया गया कि कुछ व्यक्तियों की ओर से विधायक उमेश कुमार और उनके कार्यालय से संपर्क कर अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स के लिए विज्ञापन की मांग की गई थी। मांग पूरी नहीं होने पर संबंधित व्यक्ति ने आपत्तिजनक और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री का प्रसारण आरंभ कर दिया गया। आरोप लगाया कि दुर्भावनापूर्ण तरीके से वीडियो प्रसारित कर विधायक छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। पूर्व में यह वीडियो को एडिटेड और डीपफेक पाया गया है। विधायक के निजी सहायक ने तहरीर में तीन सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी और लिंक तहरीर में पुलिस को देते हुए मामले में कार्रवाई किए जाने की मांग की। तहरीर के आधार पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।—
2023 में रुड़की और 2025 में लक्सर में दर्ज हो चुकी हैं प्राथमिकी
– तीन वर्ष पूर्व सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो का जिन्न विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर बाहर आने पर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कथित वीडियो पहली बार नवंबर 2023 में वायरल हुआ था। इस पर 26 नवंबर 2023 को खानपुर विधायक उमेश कुमार की ओर से रुड़की सिविल लाइंस कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसके बाद 1 अक्तूबर 2025 को यह वीडियो दोबारा सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। तब भी विधायक की ओर से लक्सर कोतवाली में छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसमें विधायक ने बताया था कि, वर्ष 2023 में दर्ज प्राथमिकी पर वीडियो को पुलिस ने फोरेंसिक जांच के लिए सीएफएसएल चंडीगढ़ भेजा था। सीएफएसएल की रिपोर्ट में वीडियो को एडिटेड बताया गया था। वहीं, वीडियो में नजर आ रही युवती की ओर से न्यायालय में याचिका दायर किए जाने पर उच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया प्लेटफाम्र्स से उक्त वीडियो को हटाने के आदेश के आदेश पारित किए गए थे।

