लक्सर कोतवाली पुलिस ने सीआईयू और साइबर सेल की टीम के साथ साइबर ठगी की वारदातों में शामिल एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए गिरोह के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने नगर में दो काॅमन सर्विस सेंटर संचालकों से धोखाधड़ी कर 1.71 लाख की ठगी की वारदात को अंजाम दिया था। गिरफ्तार आरोपी अंकित चौहान और विशाल चौहान निवासीगण शाहपुर थाना बेहट जनपद सहारनपुर उत्तर प्रदेश से 1.48 लाख की नकदी और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
सीओ देवंेद्र सिंह नेगी ने बताया कि 31 की देर शाम को नगर में सीएससी चलाने वाले मनीष कुमार निवासी दाबकी के संेटर पर पहुंचकर एक युवक ने खनन वाहन के पकड़े जाने पर जुर्माना भरने और सुशील कुमार निवासी दाबकी के सेंटर पर पहुंचे युवक ने पिता के कैंसर के उपचार के लिए पैसों की आवश्यकता होने की बात करते हुए सेंटर संचालकों को उनके खाते में रकम ट्रांसफर कराकर उनसे 91 हजार और 80 हजार की रकम नकद ले ली थी। जो रकम ट्रांसफर कराई गई वह साइबर धोखाधड़ी से ठगी गई थी। खाते में पैसा आने के बाद दोनों सेंटर संचालकों के खाते फ्रीज हो गए थे। मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। कोतवाली प्रभारी प्रवीण सिंह कोश्यारी, वरिष्ठ उपनिरीक्षक नितिन चैहान के नेतृत्व में सीआईयू और साइबर सैल वारदातों के खुलासे में जुटी थीं। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल नंबर, बैंक खातों और मैनुअल पुलिसिंग की मदद से आखिरकर पुलिस साइबर ठगों के गिरोह तक पहुंचने में सफल रही। पुलिस ने दोनों युवकों आरोपी अंकित और विशाल को गिरफ्तार कर लिया। अंकित से ठगी गई रकम से 80 और विशाल से 68 हजार की नकदी और वारदात में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन बरामद किए गए। कोतवाली प्रभारी प्रवीण सिंह कोश्यारी ने बताया कि आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जा रहा है।—
इमोशनल कार्ड खेलकर लोगों को ठगते थे आरोपी
सीएससी और पेट्रोल पंपों पर साइबर ठगी की रकम को नकदी में बदलकर करते थे ट्रांसफरसंवाद न्यूज एजेंसीलक्सर। आॅनलाइन ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के आरोप में गिरफ्तार दोनों युवक बेहद शातिराना अंदाज में अपने काम को अंजाम देते थे। रकम अधिक होने के कारण सीएससी संचालक अथवा पेट्रोल पंप कर्मचारियों के आनाकानी करने की संभावना के मद्देनजर युवक इमोशनल कार्ड खेलते थे। उनकी बातों पर भरोसा करके लोग आसानी से उन्हें रकम उपलब्ध करा देते थे।वरिष्ठ उपनिरीक्षक नितिन चौहान ने बताया कि गिरफ्त में आए युवक अंकित और विशाल ने लक्सर में दोनों सीएससी संचालकों को पिता को कैंसर होने और पिता के पुलिस हिरासत में होने और तत्काल रकम की आवश्यकता होने का झांसा देकर अपने जाल में फंसाया। दोनों दुकानदारों ने उनकी मजबूरी सुनकर अधिक सोच विचार किए बिना उन्हें मोटी रकम दे दी। सामान्य परिस्थितियों में वह शायद ऐसा नहीं करते। बाद में बैंक खाते फ्रीज होने के बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ। दोनों युवक गिरोह में ऊपर बैठे अपराधियों को सीएससी के कोड और स्कैनर आदि उपलब्ध कराते थे। वह एपीके और विभिन्न माध्यम से आॅनलाइन फ्राॅड कर रकम को इन खातों में ट्रांसफर करते थे। जहां से यह युवक नकद रकम हासिल कर उन्हें अपराधियों के बताए खातों में ट्रांसफर कर देते थे। इसके लिए उन्हें कमीशन मिलता था। एक बार रकम के खाते से निकलने के बाद वास्तविक स्रोत श्रृंखला टूट जाती है। इसके बाद पुलिस के लिए पैसों को रिकवर कर पाना अथवा वास्तविक अपराधी जिसके पास अंत में यह पैसा पहुंचता है, उसे ट्रेस करना नामुमकिन हो जाता है।

