उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत की हरिद्वार जनपद में बढ़ी सक्रियता ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। खासतौर पर खानपुर विधानसभा क्षेत्र में उनकी लगातार मौजूदगी और जनसंवाद के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या रावत 2027 के विधानसभा चुनाव में खानपुर से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। हालांकि उन्होंने अभी खानपुर से चुनाव लड़ने की औपचारिक घोषणा नहीं की है।
हाल ही में रावत ने हरिद्वार जिले की किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा सार्वजनिक की थी। उन्होंने हरिद्वार के साथ अपने पुराने राजनीतिक और व्यक्तिगत रिश्तों का उल्लेख करते हुए कहा था कि उनके मन में हरिद्वार का प्रतिनिधित्व करने की इच्छा है। बाद में हरिद्वार पहुंचकर उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव लड़ने का अंतिम निर्णय समय, परिस्थितियों और उम्र को देखते हुए लिया जाएगा।
इसी बीच रावत का खानपुर क्षेत्र में सक्रिय होना राजनीतिक तौर पर खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने सुल्तानपुर, लक्सर और खानपुर क्षेत्र में धन्यवाद एवं जनसंवाद कार्यक्रम किया। इस दौरान उन्होंने जनता के प्यार को चुनाव में बदलाव में बदलने और कार्यकर्ताओं से लगातार जनता के बीच संवाद बनाए रखने की बात कही।
रावत मैदान में आए तो बदल सकती है तस्वीर
खानपुर में रावत की संभावित दावेदारी की चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां पिछले चुनाव में मुकाबला काफी बहुकोणीय रहा था। वर्ष 2022 में निर्दलीय उमेश कुमार ने 38,767 मत लेकर जीत दर्ज की थी। बसपा के रविंद्र सिंह पनियाला 31,915 और भाजपा की रानी देवयानी 30,834 मतों के साथ क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को 6,289 मत मिले थे।
ऐसे में यदि कांग्रेस हरीश रावत को खानपुर से मैदान में उतारती है तो मुकाबले का स्वरूप बदल सकता है। कांग्रेस को जहां रावत के लंबे राजनीतिक अनुभव, हरिद्वार से पुराने रिश्तों और व्यक्तिगत संपर्कों का लाभ मिल सकता है, वहीं पार्टी के सामने स्थानीय स्तर पर संगठन को एकजुट रखने और टिकट के संभावित दावेदारों के बीच समन्वय की चुनौती भी रहेगी।
दूसरी ओर रावत की संभावित एंट्री से खानपुर में मौजूदा राजनीतिक ध्रुवीकरण पर भी असर पड़ने की चर्चा है। भाजपा, बसपा और निर्दलीय खेमे के सामने कांग्रेस के एक बड़े चेहरे की मौजूदगी में अपनी रणनीति नए सिरे से तय करने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि किस दल को कितना राजनीतिक लाभ या नुकसान होगा, यह आने वाले समय में प्रत्याशियों, गठबंधनों, स्थानीय मुद्दों और चुनावी परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
सियासत में अभी ‘अगर’ और ‘मगर’
फिलहाल रावत की ओर से खानपुर को लेकर अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। कांग्रेस नेतृत्व भी उम्मीदवारों को लेकर अंतिम निर्णय बाद में करेगा। लेकिन रावत की खानपुर में बढ़ती सक्रियता ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि हरिद्वार की राजनीति में 2027 का चुनाव अभी से चर्चा का केंद्र बनने लगा है। यदि पूर्व मुख्यमंत्री वास्तव में खानपुर से चुनाव लड़ते हैं तो यह सीट प्रदेश की चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल हो सकती है और यहां चुनावी रणनीतियां भी नए सिरे से आकार ले सकती हैं।
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खानपुर में हरीश रावत की दस्तक, बदलेगा चुनावी समीकरण?
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